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सीएम धामी ने मुख्य सेवक सदन में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति समुदाय के लोगों से किया संवाद

SHIDDHANT
6 Oct 2026 11:16 PM IST
सीएम धामी ने मुख्य सेवक सदन में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति समुदाय के लोगों से किया संवाद
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देहरादून: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को मुख्यमंत्री आवास स्थित मुख्य सेवक सदन में राज्य के विभिन्न क्षेत्रों, विशेषकर दूरस्थ एवं पर्वतीय क्षेत्रों से आए अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति समुदाय के लोगों के साथ अनौपचारिक संवाद किया। टिहरी, देहरादून, उत्तरकाशी, चकराता, कालसी सहित विभिन्न क्षेत्रों से आए लोगों ने मुख्यमंत्री के समक्ष अपने क्षेत्र से जुड़ी विकास संबंधी आवश्यकताओं, समस्याओं और अपेक्षाओं को रखा। मुख्यमंत्री ने सभी लोगों से आत्मीयता से संवाद करते हुए उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुना तथा संबंधित अधिकारियों को उनके यथासंभव शीघ्र समाधान के निर्देश दिए।
सभी वर्गों के समेकित विकास के संकल्प के साथ आगे बढ़ रही सरकार
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य सरकार का मूल उद्देश्य उत्तराखंड के प्रत्येक वर्ग, प्रत्येक क्षेत्र और समाज के प्रत्येक व्यक्ति को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना है। सरकार समेकित एवं समावेशी विकास के मिशन के साथ कार्य कर रही है, जिसमें समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक विकास योजनाओं का लाभ पहुंचाना सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि इससे पूर्व भी चमोली, रुद्रप्रयाग, टिहरी सहित राज्य के विभिन्न क्षेत्रों से आए अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति समुदाय के लोगों के साथ संवाद के अवसर मिलते रहे हैं। इन संवाद कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों ने अपनी स्थानीय समस्याएं और आवश्यकताएं सीधे सरकार के समक्ष रखी हैं तथा उनके समाधान की दिशा में निरंतर प्रयास किए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र की वास्तविक सफलता तभी है, जब सरकार और जनता के बीच सीधा और निरंतर संवाद बना रहे। इसी भावना के साथ राज्य सरकार द्वारा जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और आम जनता के बीच संवाद को निरंतर मजबूत किया जा रहा है, ताकि स्थानीय स्तर की समस्याओं को समझकर उनका समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया जा सके।
समान अवसर और सामाजिक सशक्तिकरण सरकार की प्राथमिकता
मुख्यमंत्री ने कहा कि बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर ने संविधान के माध्यम से समानता, सामाजिक न्याय और प्रत्येक नागरिक को समान अवसर का जो मार्ग दिखाया, वह आज भी देश के लिए प्रेरणास्रोत है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार और राज्य सरकार इसी भावना को आगे बढ़ाते हुए समाज के सभी वर्गों के सशक्तिकरण के लिए निरंतर कार्य कर रही हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि विकास का लाभ किसी एक वर्ग या क्षेत्र तक सीमित न रहे, बल्कि समाज के सभी वर्गों को समान अवसर प्राप्त हों। वंचित एवं कमजोर वर्गों, अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति समुदायों के सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक सशक्तिकरण के लिए केंद्र और राज्य स्तर पर अनेक योजनाएं संचालित की जा रही हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार के बजट में भी वंचित एवं दूरस्थ क्षेत्रों के विकास तथा कमजोर वर्गों के कल्याण के लिए महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं। सरकार की प्राथमिकता है कि योजनाओं का लाभ केवल कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि प्रत्येक पात्र लाभार्थी तक प्रभावी रूप से पहुंचे।
दूरस्थ क्षेत्रों में स्वयं पहुंचकर विकास कार्यों की ली जानकारी
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि पिछले लगभग पांच वर्षों में उन्होंने चकराता, कालसी, जौनसार-बावर क्षेत्र सहित उत्तरकाशी और राज्य के अन्य पर्वतीय एवं सीमांत जिलों के सैकड़ों भ्रमण कार्यक्रम किए हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के रूप में उनका प्रयास केवल देहरादून तक सीमित रहना नहीं रहा, बल्कि राज्य के दूरस्थ गांवों, सीमांत क्षेत्रों और पर्वतीय अंचलों में स्वयं पहुंचकर वहां की वास्तविक परिस्थितियों को समझना और स्थानीय लोगों से सीधे संवाद करना रहा है।
उन्होंने कहा कि दूरस्थ क्षेत्रों में जाकर वहां के लोगों से मिलना और उनकी समस्याओं को प्रत्यक्ष रूप से समझना सरकार की प्राथमिकताओं को जमीनी वास्तविकताओं से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम है। इससे क्षेत्रीय आवश्यकताओं के अनुरूप योजनाओं और विकास कार्यों को आगे बढ़ाने में मदद मिलती है।
डॉ. आंबेडकर से जुड़े स्थलों को पंचतीर्थ के रूप में विकसित करने की पहल
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के जीवन और योगदान से जुड़े महत्वपूर्ण स्थलों को पंचतीर्थ के रूप में विकसित कर उन्हें देश की सामाजिक चेतना से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई है। इसका उद्देश्य नई पीढ़ी को बाबा साहेब के जीवन, संघर्ष, विचारों और संविधान निर्माण में उनके योगदान से परिचित कराना है।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में भी सामाजिक एवं सांस्कृतिक विरासत को सम्मान देने की दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है। आदि गौरव महोत्सव जैसे आयोजनों के माध्यम से जनजातीय समाज की समृद्ध परंपराओं, संस्कृति, लोककला, लोकगीत, हस्तशिल्प और जीवनशैली को व्यापक मंच प्रदान किया जा रहा है। देहरादून के साथ-साथ दूरस्थ जनजातीय क्षेत्रों में भी ऐसे आयोजनों का विस्तार किया जा रहा है। हाल ही में चंपावत में आयोजित आदि गौरव महोत्सव के माध्यम से भी जनजातीय संस्कृति और विरासत को सम्मान देने का कार्य किया गया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जनजातीय समाज की संस्कृति केवल उनकी पहचान नहीं, बल्कि उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसलिए सरकार इसके संरक्षण, संवर्धन और नई पीढ़ी तक इसके हस्तांतरण के लिए प्रतिबद्ध है।
अनुसूचित जनजाति समुदाय के कल्याण के लिए अनेक योजनाएं
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार द्वारा अनुसूचित जनजाति समुदाय के शैक्षिक, सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण के लिए अनेक महत्वपूर्ण योजनाएं संचालित की जा रही हैं। एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय, जनजातीय विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति योजनाएं, जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षा एवं आधारभूत सुविधाओं का विस्तार, प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महाअभियान (PM-JANMAN) तथा धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान जैसी पहल जनजातीय समुदाय को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास हैं।
उन्होंने कहा कि जनजातीय क्षेत्रों में सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, आवास, विद्युत, रोजगार और आजीविका के अवसरों को मजबूत करने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उत्तराखंड सरकार द्वारा भी अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति समुदाय के विद्यार्थियों, युवाओं, महिलाओं और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।
समान अवसरों के विस्तार से मजबूत हो रहा सामाजिक सशक्तिकरण
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में सामाजिक समावेश और समान अवसर की भावना को नई मजबूती मिली है। विभिन्न सामाजिक एवं सामान्य पृष्ठभूमि से आने वाले लोगों को देश के महत्वपूर्ण संवैधानिक एवं सार्वजनिक पदों पर जिम्मेदारी निभाने के अवसर मिले हैं। यह उस भावना को दर्शाता है जिसमें व्यक्ति की पृष्ठभूमि के बजाय उसकी क्षमता, प्रतिभा और योगदान को महत्व दिया जाता है।
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